City Hulchul News
हर जरूरी खबर की जानकारी सबसे पहले पाएं
🔔
News Notifications नई खबर की सूचना सीधे पाएं
WhatsApp Channel सीधे मोबाइल पर खबरें पाएं
YouTube News Videos & Live Updates
f
Facebook Latest News & Updates
झारखंडबोकारो

बोकारो के किसान के बेटे जगन्नाथ ने इंटर साइंस में झारखंड में हासिल किया तीसरा स्थान

बोकारो के किसान के बेटे जगन्नाथ ने इंटर साइंस में झारखंड में हासिल किया तीसरा स्थान

बोकारो, झारखंड: आज जारी हुए झारखंड इंटरमीडिएट साइंस और कॉमर्स रिजल्ट 2025 में बोकारो जिले के एक किसान के बेटे ने पूरे राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।

चास के वी.के.एम. इंटर कॉलेज में पढ़ाई करने वाले केलिय डाबर गाँव निवासी जगन्नाथ सिंह चौधरी, किसान रामशंकर सिंह चौधरी के पुत्र हैं। उन्होंने 474 अंक प्राप्त कर झारखंड में तीसरा और बोकारो जिले में पहला स्थान प्राप्त किया।


🎓 मेहनत और संकल्प की कहानी

जगन्नाथ ने बताया कि वे आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थे। उनके पिता ने खेती कर उन्हें पढ़ाई के लिए पैसे दिए। जगन्नाथ ने चास में रहकर रोजाना 7–8 घंटे पढ़ाई की और मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया।

“मैं पूरे राज्य में टॉप-10 और जिले में टॉप करने का लक्ष्य लेकर पढ़ रहा था। आज वह सपना साकार हुआ,” – जगन्नाथ सिंह चौधरी

उन्होंने आगे बताया कि वे अब एसएससी CGL की तैयारी करना चाहते हैं और देश सेवा में योगदान देना चाहते हैं।


👨‍👩‍👧‍👦 परिवार और गाँव में खुशी का माहौल

जगन्नाथ की सफलता पर गाँव और घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। उनके पिता रामशंकर सिंह चौधरी ने कहा:

“हमें बेटे पर भरोसा था, कभी उस पर दबाव नहीं डाला। वह पढ़ाई के साथ क्रिकेट भी खेलता था, लेकिन मेहनत और लगन से उसने पूरे समाज का नाम रोशन किया है।”

उन्होंने यह भी बताया कि किसान परिवार के लिए बच्चों को पढ़ाना कठिन होता है, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति में बेटे की शिक्षा को प्राथमिकता दी।


🏫 कॉलेज को भी गर्व

वी.के.एम. इंटर कॉलेज, चास के प्राचार्य परमेश्वर शर्मा ने कहा कि जगन्नाथ शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल था और शिक्षक भी उसकी प्रतिभा को गढ़ने में लगे थे।

“हमारे कॉलेज के लिए यह गौरव की बात है कि एक किसान का बेटा राज्य में टॉप-3 में शामिल हुआ।”


✅ निष्कर्ष:

जगन्नाथ की सफलता न सिर्फ बोकारो जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह दिखाता है कि संकल्प, समर्पण और परिवार के सहयोग से कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। एक किसान का बेटा आज झारखंड के शिखर पर है — यह कहानी हर छात्र और अभिभावक के लिए मिसाल बन सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!