बोकारो थर्मल में करम महोत्सव 2026: मांदर की थाप पर झूमा मैदान, करम डाली की हुई पूजा-अर्चना
बोकारो थर्मल के स्वामी विवेकानंद मैदान में करम महोत्सव 2026 का आयोजन पारंपरिक उल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में करम डाली की पूजा-अर्चना, मांदर वादन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
प्रकृति, लोक संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का संदेश देता है करम पर्व : उपायुक्त
बोकारो थर्मल | 22 सितंबर 2026
बोकारो थर्मल के स्वामी विवेकानंद मैदान में मंगलवार को करम महोत्सव 2026 का आयोजन पारंपरिक उल्लास और उत्साह के साथ किया गया। मांदर की थाप, पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। उपायुक्त अजय नाथ झा समेत जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पारंपरिक मांदर बजाकर महोत्सव में सहभागिता की। विधि-विधान के साथ करम डाली की पूजा-अर्चना की गई।
करम महोत्सव में दिखी झारखंडी लोक संस्कृति की झलक
बेरमो प्रखंड के स्वामी विवेकानंद मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, एसडीओ बेरमो मनोज कुमार, बीडीओ मुकेश कुमार, सीओ संजीत कुमार समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने पारंपरिक लोटा-पानी से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन के साथ हुई। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान से करम यानी करमी पेड़ की डाली की पूजा की गई।
मांदर की थाप पर दिखा उत्सव का रंग
करम महोत्सव के दौरान झारखंडी लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर देखने को मिली। उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों ने पारंपरिक मांदर बजाया। वहीं, लोक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने ग्रामीणों में उत्साह भर दिया।
प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव का संदेश
उपायुक्त अजय नाथ झा ने जिलेवासियों और विशेषकर बहनों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करम पर्व लोक संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति संरक्षण, सामुदायिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश देता है। आधुनिकता के दौर में भी अपनी भाषा, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजकर रखना जरूरी है।
उपायुक्त ने जल-जंगल-जमीन और प्रकृति संरक्षण से जुड़े आदिवासी समाज की परंपराओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की अपील की।




