बोकारो: BGH में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर नुक्कड़ नाटक, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
बोकारो जनरल अस्पताल के स्कूल ऑफ नर्सिंग द्वारा प्लास्टिक के अत्यधिक और अनुचित उपयोग के दुष्प्रभावों को लेकर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने का संदेश दिया गया।
स्कूल ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभाव बताए, पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील
बोकारो | 22 सितंबर 2026
बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) में पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता को लेकर एक विशेष पहल की गई। स्कूल ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने 22 सितंबर 2026 को सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के संदेश के साथ नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। “स्वच्छता में सहभागी, स्वच्छ एवं विकसित भारत में सहयोगी” संदेश के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक के अत्यधिक और अनुचित उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया।
प्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर नुक्कड़ नाटक
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक के अत्यधिक एवं अनुचित उपयोग से पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। साथ ही लोगों को पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
यह कार्यक्रम अधिशासी निदेशक (M&HS) के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस दौरान चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
नर्सिंग विद्यार्थियों ने दिया जागरूकता संदेश
स्कूल ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल और इसके अनुचित निस्तारण से होने वाली पर्यावरणीय क्षति को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।
नाटक के माध्यम से लोगों से प्लास्टिक बैग, बोतल, कप और अन्य डिस्पोजेबल वस्तुओं के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की गई। साथ ही रीसाइक्लिंग योग्य विकल्प अपनाने और प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन का संदेश दिया गया।
स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य का संदेश
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण और जन-स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। दैनिक जीवन में छोटे-छोटे व्यावहारिक बदलाव अपनाकर प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने में योगदान दिया जा सकता है।
अधिकारियों ने भी स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक जागरूकता से जुड़े ऐसे संदेशों को समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।





