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बोकारोराजनीति

बोकारो स्टील प्लांट को मिला Lloyd’s Register प्रमाणन, अब बनेगा स्वदेशी शिपबिल्डिंग स्टील

बोकारो स्टील प्लांट को मिला अंतरराष्ट्रीय Lloyd’s Register प्रमाणन

स्वदेशी जहाज निर्माण स्टील उत्पादन में भारत को बड़ी सफलता

बोकारो, 17 मई 2026 : Steel Authority of India Limited के Bokaro Steel Plant ने समुद्री उपयोग के सामान्य एवं उच्च शक्ति वाले शिपबिल्डिंग ग्रेड स्टील के लिए प्रतिष्ठित Lloyd’s Register प्रमाणन हासिल किया है। यह उपलब्धि भारत के समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

13 मई 2026 को अंतिम प्रमाणन मिलने के साथ ही विस्तृत तकनीकी विकास और योग्यता प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई।

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कई शिपबिल्डिंग स्टील ग्रेड को मिली मंजूरी

इस प्रमाणन के तहत एलआर ग्रेड E स्टील के साथ ग्रेड A, B और D को भी स्वीकृति दी गई है।

वहीं उच्च शक्ति वाले LR EH40 स्टील श्रेणी में AH27S, AH32, AH36, AH40, DH27S, DH32, DH36, DH40, EH27S, EH32 और EH36 ग्रेड को मंजूरी प्राप्त हुई है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हुआ परीक्षण

योग्यता प्रक्रिया के दौरान वेल्डिंग प्रक्रियाओं, वेल्डर योग्यता और वेल्डिंग कंज्यूमेबल्स के चयन को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुरूप सुनिश्चित किया गया।

इसके लिए व्यापक तकनीकी मूल्यांकन, दस्तावेजीकरण, परीक्षण और प्रक्रियागत सुधार किए गए।

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कई आधुनिक वेल्डिंग तकनीकों का हुआ उपयोग

GTAW, SMAW, GMAW और SAW जैसी आधुनिक वेल्डिंग प्रक्रियाओं का कठोर परीक्षण और अनुकूलन किया गया।

Lloyd’s Register की तकनीकी टिप्पणियों और सुझावों के आधार पर प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार भी किए गए।

RDCIS और रिसर्च लैब ने निभाई अहम भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में सेल-आरडीसीआईएस और बोकारो स्टील प्लांट की रिसर्च एंड कंट्रोल लेबोरेटरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तकनीकी संस्थाओं और वेल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ समन्वय के जरिए सभी आवश्यक योग्यता मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

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आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल

यह उपलब्धि भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाणित शिपबिल्डिंग स्टील के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगी।

साथ ही देश की समुद्री अवसंरचना जरूरतों को पूरा करने में भी यह अहम भूमिका निभाएगी।

विशेष स्टील निर्माण क्षमता हुई मजबूत

इस सफलता के साथ सेल की रणनीतिक क्षेत्रों के लिए मूल्यवर्धित विशेष स्टील विकसित करने की क्षमता को और मजबूती मिली है।

यह उपलब्धि “आत्मनिर्भर भारत” और राष्ट्र निर्माण के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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