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झारखंडबोकारो

एमजीएम स्कूल बोकारो में फादर कामिल बुल्के की जयंती पर विशेष सत्र आयोजित

हिंदी साहित्य में फादर कामिल बुल्के का योगदान

बोकारो: एमजीएम हायर सेकेंड्री स्कूल सेक्टर-4 एफ बोकारो में हिंदी साहित्य के प्रख्यात विद्वान फादर कामिल बुल्के की जयंती पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्राचार्य फादर डॉ. जोशी वर्गीस ने कहा कि फादर कामिल बुल्के ने भारत में हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में अहम योगदान दिया। वे एक प्रसिद्ध विद्वान, लेखक और शिक्षाविद थे। उनकी कृति ‘रामचरित मानस उत्पत्ति एवं विकास’ और अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश आज भी व्यापक रूप से लोकप्रिय हैं।

उन्होंने बेल्जियम से भारत आकर दार्जिलिंग व कोलकाता में हिंदी सीखी और बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए और पीएचडी की पढ़ाई की। इसके बाद वे रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में हिंदी एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष बने।

महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ

  • 1950 में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद की कार्यकारिणी के सदस्य बने।

  • 1972 से 1977 तक भारत सरकार की केंद्रीय हिंदी समिति से जुड़े रहे।

  • 1973 में बेल्जियम की रॉयल अकादमी के सदस्य बने।

  • हिंदी और संस्कृत के उत्थान में योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

फादर बुल्के संस्कृत को “महारानी” और हिंदी को “बहुरानी” कहकर संबोधित करते थे। उनका मानना था कि हर भारतीय को शुद्ध हिंदी और संस्कृत बोलना और लिखना आना चाहिए।

विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की गतिविधियाँ

सत्र के दौरान कक्षा सातवीं के विद्यार्थियों ने नाट्य प्रस्तुति, भाषण और अन्य गतिविधियों के माध्यम से फादर कामिल बुल्के की जीवनी पर प्रकाश डाला। मौके पर उप प्राचार्य राखी बनर्जी, शैक्षणिक निदेशक जॉर्ज जोसफ, हेडमिस्ट्रेस सपना जोशी, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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