झारखंडबोकारो

स्वदेशी जागरण मंच बोकारो ने पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को बोकारो में दी गई श्रद्धांजलि, उनके संघर्ष और विचारों को किया गया याद

बोकारो: स्वदेशी जागरण मंच, बोकारो द्वारा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखंड आंदोलन के जनक दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह श्रद्धांजलि सभा चास स्थित प्रभात कॉलोनी में आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों ने भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए मंच के क्षेत्रीय संयोजक अमरेंद्र सिंह ने कहा कि शिबू सोरेन जी का जीवन एक संघर्ष की गाथा है। महाजनी प्रथा की बली चढ़े उनके पिता की हत्या के बाद उन्होंने सामाजिक विद्रोह का मार्ग अपनाया। पढ़ाई छोड़कर उन्होंने खुद को समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया और आदिवासी समाज को नशे और अंधविश्वास से बाहर निकालने का संकल्प लिया।

उन्होंने “पढ़ो और लड़ो” का नारा देकर समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

महाजनी प्रथा और शराब के खिलाफ उनके संघर्ष की गूंज पटना से दिल्ली तक सुनाई दी। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें पुलिस भय के चलते पारसनाथ की पहाड़ियों में शरण लेनी पड़ी।

अमरेंद्र सिंह ने कहा कि नेमरा गांव से निकले यह बागी बाद में झारखंड आंदोलन के नायक बने। 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन कर उन्होंने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में अहम भूमिका निभाई और विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जैसे पदों की गरिमा बढ़ाई।

सभा को संबोधित करते हुए उद्योगपति एवं समाजसेवी जगन्नाथ शाही ने कहा कि शिबू सोरेन जी का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि समाज के हर वर्ग में उनका प्रभाव था। वे झारखंडी अस्मिता के प्रतीक थे और आदिवासी चेतना की मुखर आवाज भी। उनका निधन एक अपूरणीय क्षति है।

सभा में उपस्थित अन्य प्रमुखों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहेगा।
सभा में मेला प्रमुख दिलीप वर्मा, अजय कुमार चौधरी, जिला संयोजक प्रमोद कुमार सिन्हा, प्रेम कुमार, नवीन कुमार सिन्हा, कार्यालय प्रमुख ददन प्रसाद, जयशंकर प्रसाद सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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