बहू पर करीब एक साल से संपर्क में नहीं रहने का आरोप, सरकार से आर्थिक मदद और पोती को साथ रखने की लगाई गुहार
हैदरनगर, पलामू | 10 सितंबर 2026
शहीद बेटे की पहली पुण्यतिथि पर मां की आंखों में छलका दर्द
देश की सेवा करते हुए शहीद हुए पलामू के आरक्षी संतन मेहता की पहली पुण्यतिथि पर उनकी मां धनकलिया देवी का दर्द सामने आया। बेटे की शहादत के एक साल बाद उन्होंने खुद को अकेला बताते हुए सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है। साथ ही उन्होंने अपनी पोती को अपने साथ रखने की इच्छा जताई है।
हैदरनगर थाना क्षेत्र के बरेवा गांव निवासी आरक्षी संतन मेहता 3-4 सितंबर 2025 को मनातू केदल जंगल में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे। उनकी पहली पुण्यतिथि के अवसर पर 4 सितंबर 2026 को बरेवा गांव में उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया था।
प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में पलामू एसपी कपिल चौधरी, हुसैनाबाद एसडीपीओ दिव्यांश शुक्ल और शहीद की मां धनकलिया देवी मौजूद थीं। वहीं शहीद की पत्नी सरिता देवी अपनी दोनों बच्चियों के साथ कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं। इसके बाद परिवार के बीच चल रहे विवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई।
मां ने बहू पर लगाया दूरी बनाने का आरोप
धनकलिया देवी ने भावुक होकर आरोप लगाया कि बेटे की शहादत के बाद वह बेहद अकेली पड़ गई हैं। उनका कहना है कि करीब एक साल से उनकी बहू से बातचीत नहीं हो रही है और वह उनसे मिलने भी नहीं आती हैं।
मां का आरोप है कि पुण्यतिथि के मौके पर भी बहू उनके पास नहीं पहुंचीं और दोनों बच्चियों को भी उनसे मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने सरकार से ऐसी आर्थिक मदद की मांग की है, जिससे वह बुढ़ापे में अपना जीवन सम्मानपूर्वक गुजार सकें।
उन्होंने अपनी एक पोती को अपने साथ रखने की इच्छा भी जताई। उनका कहना है कि पोती उनके बुढ़ापे का सहारा बन सकती है।
ग्रामीणों ने भी उठाए सवाल
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने शहीद परिवार की स्थिति को लेकर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना था कि शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी नौकरी और सहायता के उद्देश्य पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि शहीद की मां की स्थिति की अनदेखी न हो।
हालांकि, यह पूरा मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा है और इसमें दोनों पक्षों की बात सामने आना जरूरी है।
पत्नी का पक्ष नहीं हो सका सामने
पत्रकारों ने शहीद की पत्नी सरिता देवी से फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। ऐसे में इस मामले में उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है।
पत्नी का पक्ष सामने आने के बाद ही पारिवारिक विवाद की पूरी स्थिति और दोनों पक्षों के दावों की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
शहीद परिवार की मदद की मांग
शहीद संतन मेहता की मां की अपील ने एक बार फिर शहीद परिवारों के पुनर्वास, आर्थिक सुरक्षा और पारिवारिक परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि उनकी मांग पर प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।






