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बीएसएल में नए श्रम संहिताओं पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रधान नियोक्ताओं को बताए गए कानूनी दायित्व

बोकारो इस्पात संयंत्र में आयोजित संवादात्मक सत्र में 55 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन पर दिया गया जोर।

बोकारो | 13 जून 2026

बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) के मानव संसाधन विभाग की पहल पर नए श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रधान नियोक्ताओं के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने नई श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों, कानूनी जिम्मेदारियों और अनुपालन प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी।

बीएसएल में आयोजित हुआ विशेष जागरूकता कार्यक्रम

बीएसएल के अधिशासी निदेशक (संकार्य) के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में संयंत्र के शीर्ष प्रबंधन, उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) धनबाद श्री सुमित तथा सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) धनबाद-II श्री प्रभात शंकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्रधान नियोक्ताओं एवं अधिकारियों सहित करीब 55 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

नए श्रम कानूनों की दी गई विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रधान नियोक्ताओं को नए श्रम संहिताओं के तहत उनकी वैधानिक जिम्मेदारियों और अनुपालन प्रणाली के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान प्रतिभागियों को वेतन संहिता-2019, औद्योगिक संबंध संहिता-2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई।

पंजीकरण और अनुपालन प्रक्रियाओं पर चर्चा

सत्र के दौरान नई कानूनी आवश्यकताओं, पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं तथा अनुपालन संबंधी दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उनके संभावित समाधान पर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रभावी अनुपालन पर दिया गया जोर

अपने संबोधन में बीएसएल प्रबंधन ने सभी प्रतिभागियों से नए श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन के लिए जागरूक और प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। वहीं उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) श्री सुमित ने श्रम विभाग की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन देते हुए नई अनुपालन व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया।

कार्यक्रम को श्रम कानूनों की बेहतर समझ विकसित करने और औद्योगिक संस्थानों में वैधानिक अनुपालन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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