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झारखंडबोकारो

सीटू ने श्रम संहिताओं को बताया मजदूर-विरोधी, चारों श्रम संहिताएं निरस्त करने की माँग तेज

सीटू ने चार श्रम संहिताओं पर सरकार के दावों को किया खारिज, श्रम संहिताएं निरस्त करने की माँग दोहराई

बोकारो: इस्पात मजदूर मोर्चा–सीटू की ओर से बोकारो स्टील प्लांट गोलंबर पर आयोजित मजदूर सभा में यूनियन के महामंत्री आर.के. गोरांई ने केन्द्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं को मजदूर-विरोधी करार देते हुए तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार इन संहिताओं को मजदूर हितैषी और आधुनिकीकरण का कदम बताने की कोशिश कर रही है, जबकि वास्तविकता इसके उलट है।

गोरांई ने कहा कि “ये संहिताएं आज़ादी के बाद लंबे संघर्षों से हासिल श्रमिक अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला हैं। इनका उद्देश्य कॉरपोरेट को लाभ पहुंचाना, ठेका व्यवस्था को बढ़ावा देना और नियुक्ति-बर्खास्तगी को मनमाना बनाना है।”

आईएलसी दस वर्षों से बंद, सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनें विरोध में एकजुट

महामंत्री ने कहा कि भारतीय श्रम सम्मेलन (आईएलसी)—जो देश का सर्वोच्च त्रिपक्षीय मंच है—को पिछले दस वर्षों से नहीं बुलाया गया।
सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस, सेवा, एआईयूटीयूसी, एआईसीसीटीयू, यूटीयूसी, टीयूसीसी सहित सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने दस्तावेजी प्रमाणों और ठोस तर्कों के साथ श्रम संहिताओं का सर्वसम्मति से विरोध किया, लेकिन सरकार ने सभी महत्वपूर्ण आपत्तियों को नजरअंदाज़ कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति में संसद में इन संहिताओं को पारित किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अवहेलना है, उन्होंने कहा।

“चारों श्रम संहिताएं कॉरपोरेट संचालित श्रम बाजार को मजबूत करने का साधन”

सभा में वक्ताओं ने कहा कि श्रम संहिताओं का वास्तविक उद्देश्य है—

  • नौकरी की सुरक्षा समाप्त करना

  • हड़ताल के अधिकार को कमजोर करना

  • श्रम निरीक्षण प्रणाली को खत्म करना

  • ठेका व निश्चित अवधि रोजगार का विस्तार

  • यूनियनों और सामूहिक सौदेबाजी को कमजोर करना

  • सामाजिक सुरक्षा को प्रतीकात्मक योजनाओं तक सीमित करना

उन्होंने कहा कि ये सभी प्रावधान मजदूर अधिकारों को खत्म कर श्रम लागत को न्यूनतम करने का ‘कॉरपोरेट एजेंडा’ हैं।

सीटू का देश के मजदूर वर्ग से आह्वान

सीटू ने सभी चार श्रम संहिताओं को पूर्ण रूप से निरस्त करने की माँग दोहराते हुए देशभर के मजदूर वर्ग से अपील की कि वे केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के साथ मजबूत, संगठित और संघर्षशील आंदोलन को तेज करें।
गोरांई ने कहा, “भारत का मजदूर वर्ग पहले भी मजदूर-विरोधी नीतियों को हराकर अपने अधिकारों की रक्षा कर चुका है, और वह फिर ऐसा करने में सक्षम है।”

ईडी ऑपरेशन को सौंपा गया ज्ञापन

कार्यक्रम के अंत में श्रम संहिताओं से जुड़े मुद्दों पर एक ज्ञापन ईडी ऑपरेशन को सौंपा गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मोतीलाल मांझी ने की।
सभा को जमाल अंसारी, संजय अंबेडकर, मुनिलाल मांझी और हसनैन आलम ने भी संबोधित किया।

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