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झारखंडबोकारो

शिबू सोरेन के निधन पर इस्पात मजदूर मोर्चा, सीटू बोकारो ने व्यक्त की गहरी शोक संवेदना

सीटू बोकारो कार्यालय में शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि, आदिवासी आंदोलन के प्रतीक नेता को किया गया याद

बोकारो: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष व संस्थापक और आदिवासी अधिकारों की आवाज रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के निधन पर इस्पात मजदूर मोर्चा, सीटू बोकारो कार्यालय में शोकसभा आयोजित कर दो मिनट का मौन रखा गया। उनके निधन से शोकाकुल यूनियन ने उन्हें एक युगद्रष्टा और संघर्षशील जननेता बताया।

सीटू के संयुक्त महामंत्री के. एन. सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 81 वर्षीय शिबू सोरेन लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उनका देहांत हुआ।
उन्होंने यह भी बताया कि सीटू की झारखंड राज्य कमिटी में वे मुख्य संरक्षक की भूमिका में थे और उनका जाना संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

यूनियन ने झंडा झुकाकर दी श्रद्धांजलि

उनके निधन की खबर मिलते ही सीटू कार्यालय में तीन दिन तक झंडा झुकाने का निर्णय लिया गया। यूनियन नेताओं ने कहा कि शिबू सोरेन एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने गरीबों, मजदूरों और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ जमीनी संघर्ष किया।

जन आंदोलन और सिद्धांतों के प्रतीक रहे शिबू सोरेन

के. एन. सिंह ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि 1970 के दशक में उन्होंने सूदखोर महाजनों और भू-माफियाओं के खिलाफ जन आंदोलन का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्हें कई बार पुलिस की प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जेल जाना पड़ा, और कई झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने यह भी साझा किया कि शिबू सोरेन जी केवल एक राजनेता नहीं बल्कि मूल्य आधारित सोच और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे। एक प्रसंग का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब दशहरे के रावण दहन कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि रावण एक योग्य और लोकप्रिय द्रविड़ शासक था और उसका दहन करना उचित नहीं।

सीटू ने दी श्रद्धांजलि और संवेदना

सीटू, बोकारो की ओर से शिबू सोरेन जी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की गई और उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की गई।
इस अवसर पर यूनियन के अन्य नेताओं – आर.के. गोरांई, आर.एन. सिंह, आर.बी. सिन्हा, देव कुमार और गोपाल महतो ने भी श्रद्धांजलि दी और कहा कि वे झारखंड के एक जुझारू और लोकप्रिय जन नेता के रूप में सदैव याद किए जाएंगे।

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