बोकारो स्टील प्लांट में हाइड्रोलिक ऑयल की खपत कम करने का अभियान, HRFC में संगोष्ठी
बोकारो स्टील प्लांट में हाइड्रोलिक ऑयल संरक्षण को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। HRFC विभाग में आयोजित संगोष्ठी में ऑयल रिसाव रोकने, उचित रख-रखाव और प्रयुक्त ऑयल के संग्रहण व पुनर्जनन पर जोर दिया गया।
रिसाव रोकने, प्रयुक्त ऑयल के संग्रहण और पुनर्जनन पर जोर, अधिकारियों व कर्मचारियों ने लिया संकल्प
📍 बोकारो | बीएसएल
बोकारो: बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) में हाइड्रोलिक ऑयल की खपत कम करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऑयल का संरक्षण करना और अनावश्यक खपत को रोकना है।
अभियान के तहत हाइड्रोलिक ऑयल के रिसाव पर नियंत्रण और इसके बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, इस्तेमाल किए गए ऑयल के अधिकतम संग्रहण और पुनर्जनन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
एचआरसीएफ में आयोजित हुई संगोष्ठी
इसी अभियान के तहत बीएसएल के तकनीकी प्रकोष्ठ विभाग ने एचआरसीएफ विभाग में हाइड्रोलिक ऑयल संरक्षण विषय पर अर्धदिवसीय संगोष्ठी आयोजित की।
कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक (एचआरसीएफ) के साथ हाइड्रोलिक सिस्टम के संचालन और अनुरक्षण से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। बड़ी संख्या में ठेका कर्मियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

हाइड्रोलिक ऑयल के सही उपयोग की दी जानकारी
संगोष्ठी के दौरान जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। तकनीकी प्रकोष्ठ विभाग ने प्रस्तुति के माध्यम से हाइड्रोलिक ऑयल के विवेकपूर्ण उपयोग की जानकारी दी।
इस दौरान ऑयल रिसाव से होने वाली क्षति को रोकने के उपाय बताए गए। प्रभावी अनुरक्षण पद्धतियों को अपनाने पर भी चर्चा हुई।
रिसाव की समय पर पहचान पर जोर
मुख्य महाप्रबंधक (एचआरसीएफ) ने हाइड्रोलिक प्रणालियों की विश्वसनीयता बनाए रखने के साथ ऑयल की खपत कम करने पर जोर दिया।
उन्होंने रिसाव के स्रोतों की समय पर पहचान करने की बात कही। साथ ही, रिसाव का जल्द निराकरण और अनुरक्षण के दौरान ऑयल के उचित रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा।
इस्तेमाल किए गए ऑयल का होगा अधिकतम संग्रहण
सत्र में प्रयुक्त हाइड्रोलिक ऑयल के अधिकतम संग्रहण और पुनर्जनन पर भी जोर दिया गया।
इससे नए हाइड्रोलिक ऑयल की जरूरत कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ संबंधित खर्च को भी कम किया जा सकेगा।
संसाधन संरक्षण पर बीएसएल का जोर
बीएसएल का यह अभियान संसाधन संरक्षण और लागत अनुकूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके जरिए जिम्मेदार अनुरक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
अभियान की सफलता के लिए अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेका कर्मियों की सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया।






