झारखंडबोकारो

आशा हॉस्पिटल में नवजात की मौत पर हंगामा, डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप

आशा हॉस्पिटल में नवजात की मौत पर बवाल, डॉक्टर पर लापरवाही और इलाज में देरी का आरोप

बोकारो : Asha Hospital Bokaro में नवजात की मौत के बाद बोकारो में कथित चिकित्सीय लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। को-ऑपरेटिव कॉलोनी स्थित आशा हॉस्पिटल और चिकित्सक डॉ. निरंजन कुमार पर इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाया गया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ और परिजनों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।


 इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप

मृत नवजात के परिजनों का कहना है कि बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर पहले उसे डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह के पास ले जाया गया था।

वहां जांच के बाद बच्चे को डॉ. निरंजन कुमार के पास भेजा गया।


ईसीजी से पहले दी गई दवा के बाद बिगड़ी हालत

घंटों कराया गया इंतजार

परिजनों के अनुसार, डॉक्टर ने बच्चे को अपने अस्पताल “आशीर्वाद” भेजा, जहां घंटों तक इंतजार कराया गया।

इसी दौरान ईसीजी से पहले नवजात को एक दवा दी गई।


बच्चे के मुंह से निकलने लगा झाग

परिजनों का आरोप है कि दवा देने के कुछ ही देर बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई।

बच्चे के मुंह से झाग निकलने लगा और वह तड़पने लगा, लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं मिला।


मौत के बाद भी वेंटिलेटर पर रखने का आरोप

अस्पताल कर्मियों पर अभद्रता का आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया कि नवजात की मौत हो जाने के बावजूद अस्पताल में उसे वेंटिलेटर और पंपिंग पर रखा गया।

जब परिवार ने इसका विरोध किया तो अस्पताल कर्मियों ने अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट की।


अस्पताल परिसर में भारी हंगामा

घटना के बाद आशा हॉस्पिटल परिसर में बड़ी संख्या में लोग जुट गए।

परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।


डॉक्टर का पक्ष नहीं आया सामने

घटना के बाद से डॉक्टर का पक्ष सामने नहीं आ सका है।

परिजनों का आरोप है कि मामले के बाद डॉक्टर अस्पताल से चले गए।

फिलहाल प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।


Conclusion

आशा हॉस्पिटल में नवजात की मौत के बाद उठे गंभीर आरोपों ने बोकारो में स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन जहां न्याय और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

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