बोकारो: सेल कॉर्पोरेट स्तर के 45 लंबित मुद्दों को लेकर BAKS का प्रदर्शन, दूसरे चरण के आंदोलन की शुरुआत
बोकारो स्टील प्लांट में कर्मचारी मांगों को लेकर BAKS ने सिंटर प्लांट CGM कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। यूनियन ने वेज रिविजन, एरियर, बोनस फॉर्मूला और अन्य लंबित मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कही।
सिंटर प्लांट CGM कार्यालय के समक्ष कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, बोनस, वेज रिविजन, एरियर और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की घोषणा
बोकारो | 23 सितंबर 2026
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बोकारो स्टील प्लांट में लंबित कर्मचारी मांगों को लेकर बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS) ने आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। यूनियन की ओर से सिंटर प्लांट के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) कार्यालय के समक्ष बड़ा प्रदर्शन किया गया। यूनियन के अनुसार, प्रदर्शन में सिंटर प्लांट के बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
सेल कॉर्पोरेट स्तर पर 45 से अधिक मुद्दे लंबित होने का दावा
BAKS का कहना है कि बीएसएल कर्मचारियों से जुड़े 45 से अधिक मुद्दे सेल कॉर्पोरेट स्तर पर लंबित हैं। वहीं, 60 से अधिक मामले बोकारो स्टील प्लांट स्तर पर लंबित बताए गए हैं।
यूनियन के अनुसार, वेज रिविजन 2017, एरियर, बोनस फॉर्मूला, NJCS में सुधार और ग्रेच्युटी समेत कई मुद्दों को लेकर BAKS सहित विभिन्न यूनियनों ने अलग-अलग न्यायालयों में मामले दायर किए हैं।

आमरण अनशन और मौन जुलूस के लिए समर्थन मांगा
सभा को संबोधित करते हुए BAKS महासचिव हरिओम ने कर्मचारियों से आगे होने वाले आमरण अनशन और मौन जुलूस के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लंबित मुद्दों को लेकर अब संघर्ष को और तेज करना होगा।
यूनियन महासचिव ने कहा कि इस्पात मंत्रालय और सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों की मांगें लंबित हैं। उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
रिकॉर्ड उत्पादन के बीच कर्मचारियों की सुविधाओं का मुद्दा
BAKS अध्यक्ष दिलीप कुमार ने कहा कि सेल ने वित्त वर्ष 2025-26 में 19.43 मिलियन टन क्रूड स्टील उत्पादन, 19.93 मिलियन टन बिक्री और ₹1,10,810 करोड़ ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया है।
उन्होंने कहा कि कंपनी के प्रदर्शन का सकारात्मक प्रभाव श्रमिकों के बोनस, इंसेंटिव, आवास, बकाया एरियर और अन्य लंबित सुविधाओं में भी दिखाई देना चाहिए।
“आंकड़े अगर कंपनी की उपलब्धियों की कहानी कहते हैं, तो वही आंकड़े यह सवाल भी पूछते हैं कि इन उपलब्धियों में अपना पसीना बहाने वाले श्रमिकों को उसका उचित लाभ कब मिलेगा?” — दिलीप कुमार, अध्यक्ष, BAKS



